” चीन का गलत ” खान पान “
इंडिया का गलत ” खान दान “
दिल्ली का गलत ” मत दान ”
भुगत रहा है ” हिन्दुस्तान “
सांप बेरोजगार हो गये,
अब आदमी काटने लगे —
कुत्ते क्या करें ?
जब ” तलवे ” आदमी चाटने लगे —!!
कहीं चांदी के चमचे हैं —!!
तो कहीं चमचों की चांदी है —
झूठ की दूकान सजाये बैठे हैं
आपसी झगड़े भुलाये बैठे हैं
हटे ” मोदी ” तो फिर लूट खाये देश को,
सारे चोर यह उम्मीद लगाए बैठे हैं |”
” लूट कर मासूम की आबरू
जालिमों तुम्हें नींद कैसे आयी होगी।
तुमने तड़पा कर उस खिलते फूल को
अपनी बेटियों से नजर कैसे मिलाई होगी।
कसूर क्या था शायद कोई खता नहीं थी
कलेजा नहीं फटा जब वो चिल्लाई होगी।
तुम इतने बेरहम कैसे बन गए ऐ दरिंदो
सोचता हूँ शायद तालीम ऐसी पाई होगी। “